डॉ.रेकवेग अर.३२ बूंदें – अत्यधिक पसीने के लिए होम्योपैथी दवाई

Homeopathy medicine in Hindi for excessive sweat, hyperhidrosis

R32 Drops in Hindi for excessive sweat/perspiration- पसीने से कई समस्याग्रस्त परिस्तिथी निर्माण होता है, यह शरीर में बदबू फैलाता है, हाथ की बगलों(कांख) में चिपचिपाहट और चर्म रोग (जैसे एक्जीमा ), चर्म में जलन (प्रिकली हीट) इत्यादि

अत्यधिक पसीना शरीर में कई कारण से हो जाता है – रोगियों (रोग फैलने के दौरान जब बुखार हो जाती है) या रात के दौरान कुछ लोगों को पसीनेके के साथ थकान (nocturnal perspiration), यह महिलाओं में मासिक समय(क्लाइमेक्टेरिक फलशूस) से हो जाता. विभिन्न कारणों से अत्यधिक पसीना आने के लिए जर्मन होम्योपैथिक समाधान

मूल-तत्व : एसिडम नाइट्रिक D12, बेलाडोना D12, जैबोरैंडी D4, कोलियम कार्ब D6, सैल्विया ऑफ D30, सम्बूकस नाइग्रा D4, सैगुनेरिया D6, सीपिया D30, वेराट्रम D12, लैकेसिस D30.

लक्षण : अनावश्यक पसीना (विभिन्न कारणों से अत्यधिक पसीना आना) । राजोनिवत्ति सम्बन्धी ताप, साथ में पसीना । उग्र संक्रामक रोगों तथा बुखार के दौरान अत्यधिक पसीना । अन्य प्रकार के पसीने (दुर्गंध युक्त) । थकान के साथ रात में पसीना (तपेदिक पूर्व स्थिति) गर्म, ठंडा या चिपचिपा पसीना ।

क्रिया विधि : इस औषधि की क्रिया इसके मूल-तत्वों के स्वरुप के अनुसार ही कार्य करती है :

एसिडनाइट्रिक : अत्यधिक असहनीय पसीना ।

बेलाडोना : गर्म पसीना, साथ में वाष्प ।

जैबोरैंडी : विभिन्न कारणों से अत्यधिक पसीना आना ।

काली कार्ब : पसीना, थकान, कंधो के सिरों के बीच कमज़ोरी, विशेषकर रात में पसीना आने पर ।

सैल्विया ऑफ : पसीने तथा रात्रिकालीन पसीने का अवरोधक ।

सम्बूकस नाइग्रा : विभिन्न प्रकार के तीक्ष्ण रोगों के दौरान पसीना आना ।

सैंग्युनेरिया : तप्त संवेदना होने के साथ प्रचुर पसीना आना ।

सीपिया : राजोनिवत्तिकालीन तप्त संवेदना, राजोनिवत्ति जैसा पसीना ।

वेराट्रम एल्ब : ठंडा पसीना; उदर शूल ।

यह दवा प्रचुर पसीने में और कुछ बीमारियों के साथ होने वाले विभिन्न प्रकार के पसीने में क्रिया करती है ।

खुराक की मात्रा : लंबे उपचार के लिए प्रतिदिन 3-4 बार थोड़े पानी में 10-15 बूँदें लेनी चाहिए । रुक-रुक कर होने वाले पसीने में (ताप, रात का पसीना) लगातार रोगरोधी खुराक दें, अथार्त् रात के पसीने में 1/4 घंटे के अंतराल में 10-15 बूँदों की कई खुराक दें । यदि रत के प्रारंभिक भाग में पसीना आए तो यही खुराक काम करेगी । बदबूदार पसीना होने पर सिरका मिलाकर ठंडे पानी से धोया जा सकता है, तदुपरांत हैमामेलिस के तनुक त सत्त की कुछ बूंदों को शरीर पर रगड़ा जा सकता है। लाइम-बाथ तथा सॉना-बाथ भी अनुमोदित है । विषैले कारक जैसे कत्रिम रंग, शूकर माँस और तदनुरूप विषाक्त भोज्य पदार्थ नहीं लेनी चाहिए ।

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डॉ. रेक्वेग के अन्य थेरप्यूटिक दवाईयों की सूची

टिप्पणी : पूरक उत्पादों का अनुमोदन :

संक्रमणकारी रोगों के दौरान (तापमान में उतार-चढ़ाव के कारण) निम्नलिखित सम्मिश्रणों का अनुमोदन करना अनिवार्य बना देता है :

हृदय-शूल (Angina) तथा इंफ्लुएंज़ा में : R 1 तथा R 6 देखें

तपेदिक के प्रभावों में : R 48 तथा R 57 देखें ।

श्वासनलियों के (bronchial) रोगों में : जटसिन R8/R9 तथा R 43

संचरण सम्बन्धी व्यवधानों में : R 3 देखें ।

रक्तवाहिका सम्बन्धी अपर्याप्तता में : R 2

अक्टु विषाक्तता (thyreotoxicosis) में : R 51

संचरण सम्बन्धी निपात (collapse) में : R 67 देखें ।

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