R1 Inflammation Drops, शरीर, मसूड़ों की सूजन का होम्योपैथी ईलाज

R1 Inflammation drops, Homeopathy Sujan Dawai,सूजन के लिए अन्य महत्वपूर्ण होम्योपैथी दवाएं

Dr.Reckeweg R1 Drops in Hindi – Homeopathic medicine for Inflammation & Swelling. डॉ.रेकवेग अर.१ शोथ, प्रदाह सम्बन्धी ड्रॉप्स – शरीर की सूजन (चर्म, मसूड़ें, पैर, पेट) को कम करने के लिए जर्मन होम्योपैथी ईलाज

सूजन के बारे में जानकारी
जब सूजन होती है, तो शरीर के सफेद रक्त कोशिकाओं के रसायनों को रक्त या प्रभावित ऊतकों में छोड़ दिया जाता है ताकि वे अपने शरीर को विदेशी पदार्थों से सुरक्षित कर सकें। रसायनों की इस रिहाई से चोट या संक्रमण के क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है, और इसका परिणाम लालच और गर्मी हो सकता है
• त्वचाविज्ञान में सूजन की त्वचा रोग सबसे आम समस्या है। वे कई रूपों में आते हैं, कभी-कभी त्वचा की खुजली और लाली के साथ-साथ चक्कर आना, जैसे कि जिल्द की सूजन (एक्जिमा), रोसेएशिया, सेब्रोरहाइक डर्माेटाइटिस और सोरायसिस
• क्रोनिक सूजन – इसका मतलब दीर्घकालिक सूजन है, जो कई महीनों और यहां तक कि वर्षों तक भी रह सकता है। इसका परिणाम निम्न हो सकता है: जो कुछ भी तीव्र सूजन पैदा कर रहा था उसे खत्म करने में विफलता।
• तनाव! लगातार मनोवैज्ञानिक, भावनात्मक या शारीरिक तनाव, सूजन पैदा करने, कोर्टिसोल के स्तर को जन्म देती है
• बैक्टीरिया मसूड़ों के सूजन का कारण होता है जिसे “जिन्जविटिस” कहा जाता है। मसूड़े लाल हो जाते हैं, सूजन हो जाती है और आसानी से रक्तस्राव हो सकता है। मसूड़े की सूजन गम रोग का एक हल्का रूप है जिसे आमतौर पर दैनिक ब्रशिंग और फ्लॉसिंग के साथ उलट किया जा सकता है
• जब आपको साइनस संक्रमण होता है, तो यह आपके गाल, आँखें और आपके मुंह की छत के कारण सूजन बन जाती है। आप अन्य लक्षण जैसे बलगम, एक भद्दा नाक, बुखार, गले में खराश या सिरदर्द का अनुभव कर सकते हैं।

खाद्य पदार्थ जो सूजन पैदा करते हैं
वनस्पति तेल
तले हुए खाद्य पदार्थ
शोधित आटा
डेयरी पदार्थ
सिंथेटिक स्वीटनर्स
कृत्रिम (artificial food Additives)
संतृप्त वसा (saturated fats)

R1 in Hindi मूल-तत्त्व: एपिस मेल D4, बेरियम क्लोरेट D6, बेलाडोना D4, कैल्शियम आयोडेट D4, हेपर सल्फ D12, कालियम बईक्रोम D4, मैरम वेरम D6, मकेर, सब. कोर. D5, फाइटोलोका D4, लैकेसिस D12.

लक्ष्ण:
> नई तथा पुरानी सर्दी की शिकायत होने एवं पीब बनने की प्रवति के स्थानिक प्रदाह (local inflammation meaning in Hindi) के साथ गिलिटयों की सूजन। आकस्मिक रोग संक्रमण तथा तेज़ बुखार के साथ मस्तिक्ष आवरक झिल्ली , आँखों की श्लेष्मिक झिल्ली तथा कंठनली में जलन।
> विशेष रूप से कंठनली की लसिका ग्रंथियों (Lymphatics) से मवाद बहना और जलन, मुख्य
रूप से सभी प्रकार के टाँसिल सम्बन्धी गलप्रदाह, टांसिल-शोथ, रक्त-ज्वर, कान के मध्य
भाग का प्रदाह (otitis media meaning in Hindi), आँखों की श्लैष्मिक झिल्ली का प्रदाह (आँख का आना),
> उपतारा तथा रोमकपिण्ड का प्रदाह (iridocyclitis), मस्तिष्कावरक झिल्ली का
प्रदाह(meningitis) मस्तिष्कावरणश ऊपरी जबड़े से सम्बन्धित साइनस(maxillary sinus)
तथा दाँतो की जड़ों मे जलन।
> ग्रंथियों मे जलन, कनफेड़ (mumps), अण्डकोष का प्रदाह (orchitis), पाचन रस थैली का
प्रदाह (Pancreatitis), पित्ताशय का प्रदाह (Cholecy-stitis), अपेन्डिक्स का प्रदाह
(appendicitis meaning in Hindi), गभ्राशय आवरक झिल्ली का प्रदाह (parametritis meaning in Hindi), बर्थोलिन का प्रदाह (bartholinitis).
> विभिन जोडों का आमवाती प्रदाह (polyarthritis), किसी अकेले जोड़प्रदाह (monarthritis), यूरिक अम्ल होने के कारण जोडों का प्रदाह (urica), लसिका ग्रंथि का प्रदाह (lymphadenitis) लसीकावाहिनीशोथ (lymphangitis), श्लेष्मा बनने के कारण होने वाली जलन, फोड़ा, अंगुली की नोक पर फोड़ा बनना (whitlow), फुंसियाँ तथा नासूर, विसप
(erysipelas),टाँसिल पक जाना (quinsy).

R1 in Hindi क्रिया विधि:
एपिस मेल: शोथ और अंत:संचरण, जलीयशोथ सम्बन्धी सूजन।
बेरियम क्लोरेट : पुराने रोगों के साथ बच्चो के विभिन कण्ठमालापरक रोगों में गिल्टियों की
सूजन तथा पीब बन जाने की प्रव ति।
बेलाडोना : त्वचा, श्लेष्मिक झिल्लियों तथा ग्रंथियों की जलनयुक्त अतिरिक्तता। पस युक्त
(pyogenic) संक्रमण, हृदय सम्बन्दी अनियमितताये। तेज़ बुखार। श्लेष्मिक झिल्ली का
तीखापन, बड़बडाना, बुखार के साथ पसीना आना।
कैल्शियम आयोडेटम : बच्चो को आक्रान्त करने वाला टांसिलों का पुरापुराण प्रदाह, गर्दन
तथा गर्दन पीछे लसिका ग्रंथियों (lymph glands) की कण्ठमाला सम्बंदि व द्धि।
हीपर सल्फ़ : सारक सम्बन्धी जलन एवं पीब बनाने की प्रवति। सभी प्रकार के प्रादाहों में
होमियोपैथी की श्रेष्ठ औषधि है।
काली बाइक्रोम : नाक, ग्रसनी गव्हर तथा ग्रसनी की श्लेष्मा, श्लेष्मिक झिल्ली का फोड़ा या
घाव।
मेरम वेरम : गिल्टीयॉं बढ़ना (Adenoid vegetation), नासिका के पिछले भाग में पुराना
नजला।
मर्कर सब. कोर. : श्लेष्मिक झिल्ली का उग्र प्रदाह जिसमें ग्रथियाँ सूज जाती हैं। चिपचिपा
पसीना।
फाइटोलैका : ग्रसनी तथा टाँसिल की सूजन तथा गहरी लालिमा, कानों तक फैलता दर्द।

R1 खुराक की मात्रा : तेज़ बुखार के साथ तीक्ष्ण संक्रमण होने पर प्रारंभ में, 1/2 से 1 दिन तक
प्रत्येक आधे घंटे पर थोड़े पानी में 10-15 बूँदे। पीब युक्त जलन होने पर भी यही खुराक लेनी
चाहिए। (जैसे कि टॉन्सिल या फुंसियों की जलन). सुधार होने पर, यही खुराक प्रत्येक 1-2 घंटे
पर ले। ठीक होने पर, बेहतर होगा यदि लगभग एक सप्ताह तक प्रतिदिन 2-3 बार 10-15 बूँदे
ली जाए।

पुरानी शोथ : 10-15 बूँदे प्रतिदिन 2-3 बार बच्चों में पुरानी ग्रंथि सम्बन्धी अतिव दिध होने
पर संरचनात्मक संशोधन के लिए कुछ लंबे समय तक थोड़े पानी में एक बार 5-8 बूँदे।

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सूजन के लिए अन्य महत्वपूर्ण होम्योपैथी दवाएं

तीव्र श्वसन सूजन के साथ खाँसी एकोनिटम पेंटारकन
लसीका सूजन एंचेंसिया एग्गस्टिफ़ोलिया 1x टैबलेट
टॉन्सिल की तीव्र और क्रॉनिक सूजन और साइनस जर्मन टोनसियत्र्रान
सूजन ड्रैप्स दवा डॉ। बाक्षी का बी 6 ड्रॉप्स, लॉर्ड L132 बूँदें
जोड़ों में संधिशोथ सूजन और दर्द, गठिया, लूम्बागो, गठिया साल्बे जेल (ब्लूउम 52), व्हीजल ह्यूमासा सिरप
सूजन, खेल चोटों, गठिया, मांसपेशियों में दर्द बर्साइटिस; मोच और घाव एडीएल 27 इन्फ्लैमर ड्रॉप्स
विभिन्न प्रकार की सूजन; फुफ्फुसा; अंतःक्रियात्मक नसों का दर्द और घावों / घावों की चिकित्सा। एडीएल 32 ऑप्सनआट
तीव्र और जीर्ण मायलागिया, चोट के कारण दर्द, फ्रैक्चर, सूजन, हेलवेल हर्ट-200 गोलियां
मोच, मांसपेशियों की कठोरता, सूजन, सूजन, दर्द, कटिस्नायु, संधिशोथ, गाउट और ओस्टियो-गठिया। लार्ड रीहू-कोल जेल
मसूड़ों की सूजन लार्ड कैमोडेंट जेल टूथ पेस्ट, हेक्लापाइरिन टूथ पाउडर
लारेंजिटिस, ल्योरीजल सूजन और दर्दनाक निगलने भार्गव मिनिमस लिरीन
आंखें, क्रोनिक और तीव्र नेत्रश्लेष्मलाशोथ में सूजन या जलन व्हीजल ऑय ब्राईट ड्रॉप्स, सिनेरिया मरितामा ड्रॉप्स
एनीमिया, बुखार और सूजन फेरम फॉफोरिकम (फेर। फाओस)
त्वचा और नरम ऊतकों पर सूजन, जोड़ों की दर्दनाक सूजन अर्नीका मरहम
जला हुआ त्वचा, सूजन कंथारिस मरहम
जोड़ों, रडंड और स्नायुबंधन की दर्दनाक सूजन आर्थरल गोलियां
कान के संक्रमण, खुजली और दर्दनाक सूजन मूलियन आयल
गुर्दे में सूजन मिनम्स ना 29 यूरीकिन
मुँहासे, मुंह,  लालिमा, खुजली और सूजन, हार्मोनल परिवर्तन, यौवन और मासिक धर्म के दौरान मिनम्स ना 31 अकिनिन
मूत्र पथ सूजन मिनम्स नंबर 41 रेनालिन
पेट और अतिसंक्रमण की दर्दनाक सूजन मिनम्स ना 49 गैसिन

 

डॉ. रेक्वेग के अन्य थेरप्यूटिक दवाईयों की सूची

टिप्पणी : एफ्लुएंज़ा में R6 का प्रयोग करें
जोड़ों के पुराने प्रदाह (Arthritis) में R11 का प्रयोग करे
विभिन जोड़ो के उम्र आमवाती प्रदाह में शुरू में R24 के साथ R1 को बरी-बरी से एक या दो
घन्टे के एकान्तरण से प्रयोग करे।
डिम्बाशय के प्रदाह में : R24 को R1 के साथ बरी-बरी से देते रहे।
डिम्बग्रंथियों तथा डिम्बवाही नलियों के प्रदाह में तथा गर्भाशय आवरक झिल्ली को जोड़ने
वाले ऊतक के प्रदाह में अतिरिक्त औषधि के रूप में R 38 तथा R 39 का भी प्रतिदिन 2-3
बार व्यवहार करे।
पुराने प्रवेगी अपेंडिक्स के उग्र प्रदाह (Appendicitis) में : प्रतिदिन एक बार R1, R24 तथा R 38 की 10-15 बूंदे ले।
अपेंडिक्स के उग्र प्रदाह (Acute Appendicitis) में जब तक शल्य चिकित्सा द्वारा अपेंडिक्स
को हत्या नहीं जाता : R 24 तथा R 38 की 10-15 बूँदे प्रत्येक एक-दो घंटे पर बरी-बरी से लें।
दाँत निकलने से संभंदी तकलीफों में : R 35 देखें।
श्वास नाली के प्रदाह (Bronchitis) में : R 48 तथा R 57 देखें; यदि आवश्यक हो तो जटसिन
R8 तथा R9 को देखें।
काली खाँसी (Whooping cough) में : जटसिन बूँदे R9 तथा सिरप R8 देखें।
माँसपेशी संबंधी तथा जोड़ो का पुराना आमवात (Rheumatism meaning in Hindi) : R11 तथा R46 .
गुर्दे की पथरी (Nephrolithiasis): R 27 देखें।
मूत्राशय तथा गुर्दे का प्रदाह (Cysto-pyelitis) : R 18 देखें।
फेफडों की झिल्ली का प्रदाह (Pleuritis meaning in hindi) : R 24 देखें।
टॉन्सिल प्रदाह (Tonsillitis) कंठ प्रदाह एवं गुर्दे के प्रदाह (Nephritis meaning in Hindi) : के उपरांत पेशाब में प्रोटीन जाने पर (Proteinurea) अतिरिक्तऔषधि के रूप में R64 का व्यवहार करें।
एफ्लुएंज़ा : R6 देखें।
पाचन रस थैली के प्रदाह (Pancreatitis) में: R72 देखें।

R1 Inflammation Drops, शरीर, मसूड़ों की सूजन का होम्योपैथी ईलाज&rdquo पर एक विचार;

  1. जैसा कि आज आधुनिक जीवन में लोग एलोपैथी कि दवायें ज्यादा उपयोग करते है लेकिन अब कई रिसर्च में ये साबित हो रहा है कि कई ऐसी एलोपैथी दवाओं में एस्टरॉयड पाया जाता है जैसे अस्थमा कि बीमारियों में इस से अस्थमा तो ठीक होता है लेकिन अस्थमा तो ठीक होता है लेकिन दवाओं में एस्टरॉयड होने के कारण ये हमारे फेफड़ो पर असर करता है जिस हेपेटाइटिस जैसी बीमारियां उत्पन्न हो जाती है एस्टरॉयड तो कई देशो में पूरी तरह बैन भी है लेकिन होमियोपैथी दवाओं में ऐसा कुछ नहीं होता ये पूरी तरह सुरच्छित है एक एक BHMS स्टूडेंट होने के नाते हम होमियोपैथी दवाओं को आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है जिससे लोग अभी भी अवगत नही है

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