Reckeweg R36 Drops in Hindi – Diseases of the nerves, Chorea, St. Vitus’ dance, नस-नाड़ियों के रोग, नर्तन रोग, अंग कम्पन के लिए जर्मन होम्योपैथी दवाई
नस-नाड़ियों (तंत्रिकाओं)के कई रोग हैं। तंत्रिकाओं की बीमारी को न्यूरोपैथी भी कहा जाता है।
आघात – नसों को चोट पहुंचाई जा सकती है जैसे कि चाकू से काट लिया जा रहा है या जब हड्डी टूट जाती है (फ्रैक्चर।)विषाक्त पदार्थ – नसों को विषाक्त पदार्थों से चोट पहुंचाई जा सकती है। इन पदार्थों को पाइजन कहा जाता है जो किसी जीव को चोट पहुंचा सकते हैं। नसों में चोट लगानेवाली कुछ विषाक्त पदार्थ हैं: शराब, सीसा और कुछ नशीला पदार्थ और दवाएं
संक्रमण – नसों को संक्रमण से चोट पहुंचाई जा सकती है
रोग – नसों को कुछ बीमारियां होने से चोट लगी जा सकती है। न्यूरोपैथी का कारण होने वाला सबसे आम रोग मधुमेह है इसे मधुमेह न्यूरोपैथी कहा जाता है।
तंत्रिका क्षति के लक्षण
• कमजोरी
• मासपेशी अत्रोप्य
• मोड़ना, जिसे फासीक्यूलेशन भी कहा जाता है
• पक्षाघात
• दर्द
• संवेदनशीलता
• सुन्न होना
• झुनझुनी या गुदगुदी
• जलता हुआ
मूल-तत्व : एगेरिकस D 12, इग्नेशिया D 12, लैकेसिस D 30, मैग्नीशिया फॉस्फोरिका D 12, फॉस्फोरस D 30, ज़िंकम वैलेरियानिक D 8.
लक्षण : विभिन्न कारणवश आसपास की घटनाओं के प्रति बच्चों के तंत्रिका तंत्र की अतिसंवेदनशीलता (over-sensitivity), स्नायु रोग (nervous diseases) जैसे नर्तन रोग (St. Vitus’ dance), इन सबका उपचार निर्विषीकरण वाली मध्यम क्रियाशीलता की दवा जो R 36 जैसी होम्योपैथिक औषधि पर आधारित हो से सम्भव है ।
क्रिया विधि: विभिन्न लक्षण ही इसके घटकों (constituents) के विस्तत कार्यक्षेत्र के मापदण्ड हैं :
एगेरिकस : अमेनिटा मस्केरिया (Amanita muscaria) के इस सत्व का पेशी की मरोड़ तथा तंत्रिका सम्बन्धी ऐंठन पर विशिष्ट प्रभाव होता है ।
इग्नेशिया : तंत्रिका सम्बन्धी चिड़चिड़ापन, बेचैन नींद एवं अवसाद की सभी तीक्ष्ण स्थितियों में क्रिया करती है ।
लैकेसिस : तंत्रिका सम्बन्धी चिड़चिड़ापन तथा बेचैन नींद की सभी तीक्ष्ण स्थितियों में क्रिया करती है ।
मैग्ने फॉस : मरोड़ तथा कशेरुकीय अस्थि-मज्जा (Spinal marrow) की जलन की सामान्य औषधि ।
फॉस्फोरस : बहुत तेज़ी से बढ़ने वाले तथा सामान्यत बहुत दुबले-पतले लोगों के विकास में संरचनात्मक (constitutional) दवा ।
ज़िंकम : ऐंठन, पैरों में बेचैनी, तंत्रिका सम्बन्धी मरोड़ ।
खुराक की मात्रा : गंभीरता के स्तर के अनुसार प्रतिदिन 2-3 बार थोड़े पानी में 5-8-10-15 बूँदें । तीक्ष्ण स्थितियों के साथ लगातार दौरे तथा मरोड़ होने पर प्रत्येक 1-2 घंटे पर, निम्नलिखित दवा के विकल्प के रूप में लें ।
दौरे की तीक्ष्ण स्थिति में अन्य मिश्रणों के साथ प्रत्येक पाँच मिनट पर दवा ली जा सकती है ।
सभी प्रकार के उद्दीपक, विशेषकर एल्कोहल तथा चाय नहीं लेनी चाहिए ।
टिप्पणी : पूरक मिश्रणों के रूप में R 33, R 14 तथा R 31 भी लें, यदि बच्चों में रक्त की कमी हो अथवा कंठमाला रोग से ग्रस्त बच्चों के लिए R 1 लें ।
रक्त-वाहिकाओं की जलन के लिए R 22 का प्रयोग करें ।



Hatho ki ugaliyo ka kammpan thik nahi ho pa raha jabki 2 sisi r36 le chuka hu please help me
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