रेकवेग R87 Anti-Bacterial Drops रोगाणु नाशक,बैक्टेरियल संक्रमण के लिए

R87 homeopathy medicine in Hindi for bacterial infection of stomach vagina cellulitis etc

बैक्टेरियल संक्रमण के बारे में संक्षिप्त विवरण
कई मानव बीमारियां या तो बैक्टीरिया या वायरस के संक्रमण के कारण होती हैं, दोनों अक्सर एक ही तरह से प्रसारित होती हैं, लेकिन लक्षण और उपचार विधियां अलग-अलग हो सकती हैं। जीवाणु त्वचा संक्रमण आमतौर पर स्टाफिलोकोकस और स्ट्रेप्टोकोकस या अन्य जीवों के ग्राम-पॉजिटिव उपभेदों के कारण होते हैं। सामान्य जीवाणु त्वचा संक्रमण में शामिल हैं: सेल्युलाइटिस जो एक दर्दनाक, लाल चक्कते संक्रमण का कारण बनता है जो आम तौर पर स्पर्श के लिए गर्म होता है। जीवाणु गैस्ट्रोएंटेरिटिस संक्रमण (पेट का इन्फेक्शन)आमतौर पर एक से तीन दिनों तक रहता है। कुछ मामलों में, संक्रमण सप्ताहों तक चल सकता है और इलाज न किए जाने पर हानिकारक हो सकता है। सेप्टिसिमीया तब होता है जब शरीर में अन्य जीवाणु संक्रमण फेफड़ों या त्वचा में जो होता है, रक्त प्रवाह में प्रवेश करता है और यह जीवन को खतरे में डाल सकता है। अधिकांश जीवाणु रोगों को एंटीबायोटिक्स के साथ इलाज किया जा सकता है, हालांकि एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी उपभेद उभरने लग रहे हैं

R87 drops Hindi लक्षण : जीवाणु सम्बन्धी संक्रमण, आंतरिक अथवा बाह्य। कमजोर रोग प्रतिरोधक प्रणाली अथवा जीवाणु सम्बन्धी अंतःसंचरण से बचावकारक के रूप में।

आर ८७ ड्रॉप्स मूल-तत्व : बोटुलिनम D30, ई-कोलाई D30, ग्लैंडुले थायमी D30, हाइड्रास्टिस D3, न्यूमोकॉक्सिनम D30, प्रोटियस D30, सूडोमोनास D30, सैलमोनेला D30, स्कार्लेटिनम D30, स्टैफाइलो कॉक्सिनम D30, स्ट्रेप्टोकॉक्सिनम D30, ट्यूबरक्यूलिनम D30

आर ८७ ड्रॉप्स क्रिया विधि : बोटुलिनम, ई-कोलाई, न्यूमोकॉक्सिनम, प्रोटियस (Proteus) सूडोमोनास, सैलमोनेला, स्कार्लेटिनम (Scarlatinum), स्टैफाइलो कॉक्सिनम, स्ट्रेप्टोकॉक्सिनम, ट्यूबरक्यूलिनम : उपर्युक्त औषधियां, उच्च शक्ति में रोग प्रतिरोधक प्रक्रिया पर जनितरोधी रूप से कार्य करती हैं, जिससे श्वेत रक्त कणिकायें रोगाणुओं को पहचानने तथा नष्ट करने के लिए कार्य कर सकें। यहाँ रोगक्षमीकरण (Immunization) का ही सिद्धांत लागू होता है, और केवल उच्च शक्ति अथवा तनुकरण की खुराक से कोई दुष्प्रभाव नहीं होते।
ग्लैंडुले थायमी : जीवाणु सम्बन्धी रोग प्रतिरोधक प्रक्रिया के लिए ग्रंथियों की मदद करती है।
हाइड्रास्टिस : शक्तिशाली प्राकृतिक रोगाणु नाशक।

आर ८७ ड्रॉप्स खुराक की मात्रा : प्राकृतिक, कुप्रभाव मुक्त रोगक्षमीकरण (Immunization) फार्मूले के लिए जीवन के प्रथम २ वर्षों तक महीने में १ बार ३ दिन के लिए प्रतिदिन ३ बार ३ बूँद दें। बड़े रोगियों के लिए जीवाणु सम्बन्धी संक्रमण में प्रतिदिन ३ बार १० बूँद लें, बचाव के लिए दिन में १ बार १० बूँद लें।

टिप्पणी : बुखार गला खराब होने पर R1 का प्रयोग करें, अतिसार के लिए R4, मूत्राशय सम्बन्धी संक्रमणों के लिए R18, R25, स्वरयंत्र प्रदाह के लिए R45, चोट के लिए R55, मुँहासे के लिए R53।
रोग के कारणों का इतिहास : त्वचा पर और आंत (Bowel) में सभी प्रकार के जीवाणु होते हैं। ये जीव अपने मनुष्य-रूपी साथी के साथ सहचर्य में रहते हैं। मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता जीवाणु को नियंत्रित रखती है, अतः ये पाचन, अवशोषण तथा विष-निरोधी कार्यों सहायता दे सकते हैं। जीवाणु अनेक आवश्यक प्रक्रियायें प्रदान करते हैं तथा अस्तित्व के लिए आवश्यक होते हैं। एंटीबायोटिक्स या प्रतिजैविक पदार्थ बिना रोग प्रतिरोधक प्रक्रिया को लाभ दिये इन जीवाणुओं पर प्रत्यक्ष प्रहार करती हैं।

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