डॉ.रेकवेग R85 BP Medicine, उछ रक्तचाप, हाई ब्लडप्रेशर की दवा

R85 drops in Hindi high blood pressure medicine for hypertension

हाइपर्टेंशन या हाई ब्लडप्रेशर के बारे में संक्षिप्त विवरण
हाई ब्लडप्रेशर, या उच्च रक्तचाप तब होता है जब आपका रक्तचाप अस्वास्थ्यकर स्तर तक बढ़ जाता है। आम तौर पर उच्च रक्तचाप को 140/90 से ऊपर स्थर का रक्तचाप परिभाषित किया जाता है, और दबाव 180/120 से ऊपर होने पर गंभीर माना जाता है। आपके रक्तचाप के माप में यह ध्यान दिया जाता है कि आपके ब्लड वाहिकाओं के माध्यम से कितना खून गुजर रहा है और रक्त की प्रतिरोध की मात्रा कितनी है जो दिल पंप कर रहा है। अकसर उच्च रक्तदाब के कोई लक्षण नहीं होते हैं। समय के साथ, अगर इलाज नहीं किया जाता है, तो यह हृदय रोग और स्ट्रोक जैसे स्वास्थ्य की स्थिति पैदा कर सकता है। कम नमक के साथ एक स्वस्थ आहार खाना, नियमित रूप से व्यायाम करना और दवा लेना रक्तचाप को कम करने में मदद कर सकता है।

R85 drops Hindi लक्षण : प्रकुंचनीय (Systolic) रक्तचाप १४० से ऊपर अथवा अनु-शिथिलनीय (Diastolic) रक्तचाप ९० से ऊपर उच्च रक्तचाप कहलाता है।

आर ८५ हाई ब्लडप्रेशर की बूँदें मूल-तत्व : एलियम सैटिवम D3, साइट्रस मेडिका लिमोनम D3, कोर D30, ग्लैंडुले सुप्रारेनलेस D30, कैलियम आयोडेटम D3, कैलियम फॉस्फोरिकम D4, मेसेनसेफेलन D30, रेन D6, D12, D30, टॉरटेरस डेपुरेटस D5, वैलेरियाना D3

आर ८५ बूँदें क्रिया विधि : एलियम सैटिवम : रक्त चाप कम करता है।
साइट्रस मेडिका लिमोनम : तेज मूत्रवर्द्धक प्रभाव।
कोर : ग्रंथि सम्बन्धी उद्दीपन।
ग्लैंडुले सुप्रारेनलेस : ग्रंथि सम्बन्धी उद्दीपन करती है।
कैलियम आयोडेटम : पोटाशियम अवशोषण को शक्ति देती है, रक्त का चिपचिपापन (Viscosity) धटाती है।
कैलियम फॉस्फोरिकम : संचरण सम्बन्धी दोषों को दूर करती है।
मेसेनसेफेलन : ग्रंथि सम्बन्धी उद्दीपन (Stimulation) करती है।
रेन : हार्मोन सम्बन्धी रक्त चाप को नियमित करती है।
टॉरटेरस डेपुरेटस : तेज मूत्रवर्द्धक प्रभाव।
वैलेरियाना : शांतिदायक प्रभाव।

आर ८५ हाई ब्लडप्रेशर की बूँदें खुराक की मात्रा : सामान्यतः ३ बार १० बूँद अनुमोदित हैं, पानी की उतनी मात्रा के साथ, जितनी गुर्दे सहन कर सकें। अधिक तीव्र, पुराने रोग के लिए प्रतिदिन ६ बार ५-१० बूँदें दें, साथ में संरक्षक आहार के रूप में पोटाशियम संयुक्त भोजन अथवा प्राकृतिक पोटाशियम के पूरक दें।

टिप्पणी : दुर्बल ह्रदय के लिए R2 तथा R66 दें, गुर्दे से सम्बन्धित होने पर R18 तथा R27 दें; गुर्दे में प्रोटीन जमने पर R64, साथ ही क्षतिग्रस्त संचरण में R63 तथा R67, रक्त वाहिका स्थिरता में R42 तथा बैचेनी में विटा-सी 15, R22, R36, R47 का प्रयोग करें।

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