रेकवेग R48 in Hindi, Pulmonary Drops फेफड़ों की बीमारी की दवा

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मूल-तत्व: एसिड पिक्रिन D 8, ब्रायोनिया D 12, डल्कामारा D 30, फेरम फॉस D 12, कैलियम कार्ब D 6, लाइकोपोडियम D 30, सीपिया D 6, साइलीशिया D 30, चायना D 6, फॉस्फोरस D 30.

लक्षण: फेफड़ों की दुर्बलता तथा तपेदिक रोग की प्रारंभिक अवस्था। श्वास-दमा, पुराना फेफड़ों सम्बन्धी नजला, अत्यधिक धूम्रपान से उत्पन्न खाँसी में पूरक औषधि।
ऊपरी वायु मार्गों के सभी प्रकार के नज़ला सम्बन्धी प्रभावों में पूरक या वैकल्पिक दवा। कंधों की हड्डियों के बीच दर्द तथा दुर्बलता, बेचैनी, रात में पसीना निकलना।

क्रिया विधि: एसिड पिक्रिन: आलस में तथा कंधों की हड्डियों के बीच में जलन और दर्द।
ब्रायोनिया: पसलियों के निकटवर्ती फेकड़ों की झिल्ली की सर्दी व क्षोभ (Irritation) को कम करती है। इसे फेफड़ों की झिल्ली के प्रदाह (Pleurisy) में देते हैं, जिसके कारण प्रायः तपेदिक (टी.बी.) रोग विकसित होता है।
डल्कामारा: जल-प्रवण शारीरिक गठन वाले व्यक्तियों में अंगों के भीग जाने से दुष्परिणाम। कंधों पर दबाव।
फेरम फॉस: ठंड लगने के बाद, ऊपरी वायु मार्गों की उत्तेजना तथा लगातार खाँसी होने पर। श्वासनलियों के ज्वरयुक्त प्रदाह (Bronchitis) तथा श्वासनलियों के इर्द-गिर्दहोने वाले प्रदाह (Peribronchitis) के साथ श्वासनली से जुड़े फेफड़ों को केन्द्रित करते हुए फेफड़ों के तपेदिक साथ में ज्वरीय तथा उपज्वरीय तापमानों में।
शारीरिक द्रव्यों के नष्ट हो जाने तथा कमजोरी देने वाली बीमारियों के बाद सामान्य बलवर्धक औषधि। फेफड़ों सम्बन्धी रोगों, निमोनिया तथा तपेदिक में चुनींदा प्रभाव।
कैलियम कार्ब: रात में आने वाला पसीना तथा कंधों की हड्डियों के बीच की कमजोरी रोकने में, जैसी तपेदिक पूर्व लक्षणों में अक्सर होती है।
लायकोपोडियम: लीवर के लिए प्रभावशाली, शरीर के बीमार अंगों से विषाक्त पदार्थ निकालने में सहायक सिद्ध होती है। भूख बढ़ाती है।
सीपिया: शारीरिक संरचना पर सामान्य प्रभाव, शरीर के लिए सामान्य बलवर्धक औषधि (Tonic)। बेचैनी, कमजोरी, शक्ति का अभाव, थकान का अवरोधक।
साइलीशिया: फेफड़ों के शोथ तथा फेफड़ों की वायु कोष्ठिका की जलन में प्रभावी।
यह दवा मुख्यतः संरचनात्मक दुर्बलता पर कार्य करती है। विशेषकर फेफड़ों की तथा तपेदिक पूर्व कमजोरी की स्थितियों में।
तपेदिक में इसका प्रयोग बलवर्धक औषधि के रूप में तथा शरीर के संरचनात्मक सुधार में किया जा सकता है।
श्वास दमा तथा सर्दी आदि से होने वाली कमजोरी में भी इसका प्रयोग पूरक औषधि के रूप में कर सकते हैं।

खुराक की मात्रा: सामान्यत, प्रतिदिन तीन बार भोजन के पूर्व थोड़े पानी में १०-१५ बूँदें। पीठ के दर्द में दवा की यही खुराक प्रत्येक ५-१० मिनट पर लें।

टिप्पणी: पूरक दवायें:
R 43, दमा में।
R 6, इन्फ्लुएंजा तथा बुखार में।
R 24, पसलियों के निकट स्थित फेफड़ों की झिल्लियों की तथा फेफड़ों की झिल्लियों के शोथ में।
R 32, थकाने वाले पसीने में, विशेषकर रात में आने वाले।
R 34, फेफड़ों के विकार स्थानिक केन्द्र (focal centre) में कैल्सीकरण सुधारने के साथ बच्चों में हाइलस (hilus) ग्रंथि को आक्रांत करने वाली टी.बी. के उपचारार्थ।

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