मूल-तत्व: आर्सेनिकम एल्बम D8, बेलाडोना D30, ब्रायोनिया D12, कार्बो वेज D30, कालियम फॉस. D30, हाइपोफाइसिस D30, नैट्रम. क्लोर D30, नैट्रम सल्फ. D200, वेराट्रम D30, यर्बा सैण्टा D12.
लक्षण: श्वास दमा तथा श्वासनलियों का संस्तम्भी प्रदाह (Spastic bronchitis)। श्वास दमा का सारभूत (Constitutional) उपचार।
क्रिया विधि: दमा का उपचार करते समय औषधियों द्वारा वास्तविक दौरों के उपचार की अपेक्षा, खमीरण प्रणालियों (fermenting systems) का गठनात्मक सुधार सर्वाधिक महत्व रखता है साधारणतया प्रचलित औषधियां केवल हिस्टेमीन या उसके उत्पादों का अवरोध करती हैं या उन्हें निष्क्रिय करती हैं। यह गठनात्मक सुधार केवल R 43 द्वारा होता है।
निर्दिष्ट औषधियों का व्यवहार निम्नांकित लक्षणों के आधार पर किया जाता है :
आर्सेनिक एल्ब: बेहद बेचैनी, घबराहट।
बेलाडोना: दमा-निरोधक औषधि, प्रमुखतया जब तेज आवाज के साथ खाँसी होती है और अत्यधिक पसीना आता है।
ब्रायोनिया: सूखी खाँसी में चिड़चिड़ापन, बलगम को बाहर फेंकने में कठिनाई। श्वास के साथ ताजी हवा लेना श्रम साध्य, घुटन।
हाइपोफाइसिस: जैसा नाम वैसा काम के अनुसार’ पियुषिका ग्रंथि (Hypophysis) को शक्ति प्रदान करती है।
कालियम फॉस: कमजोरी दूर करती है। नाड़ियों के लिए पोषक औषधि।
नेट्रियम क्लोरैट: ऐंठन युक्त तथा सूखी खाँसी, श्लेष्मिक झिल्लियों में चिड़चिड़ापन। अवटुग्रंथि की अधिक सक्रियता जैसे रोगों में संरचनात्मक औषधि सिद्ध होती है।
नैट्रम सल्फ: उदजनात्मक अथवा जल-प्रकृति के शारीरिक गठन वाले रोगियों के लिए एक संरचनात्मक दवा, नम मौसम (धुंध) में रोगवृद्वि होती हैं।
वेराट्र एल्ब: ठंडा पसीना तथा दमा के दौरे।
यर्बा सैण्टा: श्वासनलियों का दमा सम्बन्धी प्रदाह, साथ में खाँसी और बलगम।
खुराक की मात्रा: लंबे उपचार के लिए प्रतिदिन २-३ बार भोजन के पूर्व थोड़े पानी में १०-१५ बूँदें। दौरे से मुक्त समय में यही खुराक प्रतिदिन एक या दो बार लेनी चाहिए। जैसे ही दौरे आयें, लगातार खुराक लेनी चाहिए, पहले प्रत्येक १/२ घंटे पर, फिर प्रत्येक १/४ घंटे पर या प्रत्येक ५-१० मिनट पर १०-१५ बूँदें। बेहतर होगा यदि थोड़े गर्म पानी में लें, जिससे प्रभाव बढ़ें।
टिप्पणी: पूरक मिश्रण जो लाभकारी हैं:
R 14, तेज संवेदनाओं (strong emotions) के बाद।
R 3, जब हृदय पर दबाव का अनुभव हो।
R 2, पीड़ा और धड़कन बढ़ना।
R 48, नये और पुराने रोग। दमा जैसी स्थिति।
R 45, गले की खराश व स्वरयंत्र की सर्दी।
R 6, जब श्वासनलियों का ज्वरयुक्त प्रदाह सहवर्ती हो।
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क्या केवल R 43 से अस्थमा का इलाज हो सकता है?
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