डॉ रेकवेग R 42 शिराओं सम्बन्धी स्थिरता, शिरा का फैलना या सूजन, शिराओं की जलन

Reckeweg R42 homeopathy varicose medicine in hindi, शिराओं सम्बन्धी स्थिरता, शिरा का फैलना या सूजन, शिराओं की जलन

मूल-तत्व: एस्कुलस D30, बेलाडोना D12, कैल्शियम फ्लोर D30, कार्डुअस मैरिएनस D12, हैमामेलिस D6, प्लैसेन्टा D30, पल्साटिल्ला D30, सीकेल कौर्न D30, मेजीरियम D12, वाइपेरा बेरस D12.

लक्षण: शिरा सम्बन्धी स्थिरता (venous stasis), शिरा का फैलना तथा शिरा-सूजने का रोग, किसी शिरा के फैले हुए भाग का एक्जिमा (Varicose eczema), शिराओं में जलन, निचले अंगों की शिराओं में अवरोध, साथ ही भारीपन की अनुभूति तत्पश्चात एक्जिमा एवं खुजली।

क्रिया विधि: एस्कुलस हिप्पोकैस्टेनम: नाड़ी फूलने और उनमें अवरोध के लिए विशिष्ट दवा।
बेलाडोना: स्थानीय जलन।
कैल्शियम फ्लोरेटम: दुर्बल ऊतकों तथा शिराओं के फूले हुए भाग पर अनुकूल प्रभाव डालती है।
कार्डुअस मैरिएनस: जाँघ (निचले भाग) पर एक्जिमा।
हैमामेलिस: शिरा सम्बन्धी प्रणाली के सभी प्रकार के रोगों के लिए विशिष्ट, विशेषकर प्रभावित अंगों में पीड़ा होने पर। यह शिराओं में उत्पन्न होने वाली रुकावटों को दूर करने में प्रभावी क्रिया करती है।
मेजीरियम: पनीले फफोलों के रूप में प्रकट होने वाली फुंसियाँ; प्रभावित भाग में ठंडक का अनुभव।
प्लैसेन्टा: रक्त-प्रवाह का उद्दीपन तथा संपूर्ण हार्मोन सम्बन्धी ग्रंथि प्रणाली का उद्दीपन करती है।
सीकेल: धमनी-शिरा सम्मिलन तथा पूर्व कोशिकाओं (precapillaries) में विकार।
वाइपेरा बेरस: विषाक्त प्रकृति के रोगों के साथ भारीपन की अनुभूति जैसी शिराओं की जलन तथा शिरा सम्बन्धी स्थिरता में पायी जाती है।
प्रस्तुत औषधि की सामान्य क्रिया, शिराओं की स्थिरता सम्बन्धी लक्षणों को नष्ट करने के साथ ही शिराओं की फूली हुई अवस्थाओं व उनके उत्तर प्रभाओं, श्लीपद रोग तथा जाँघों के निचले भागों में पानी वाली सूजन पर होती है।

खुराक की मात्रा: लंबे उपचार के लिए प्रतिदिन ३ बार भोजन के पूर्व थोड़े पानी में १०-१५ बूँदें। जलन और एक्जिमा में लगातार खुराक (विशेषकर, यदि बार-बार दर्द महसूस हो)। नियमानुसार प्रत्येक १/२-१ घंटे पर १० बूँदें।

टिप्पणी: पूरक मिश्रण:
R 1: तीक्ष्ण जलन के लिए
R 2: खून जमने से किसी रक्तवाहिनी की पूर्ण या आंशिक रूकावट (thrombosis) तथा संभावित अन्तः शल्यता (threatened embolism) के भय में हृदय के शक्ति वर्द्धन के लिए।
R 26: शरीर से हानिकारक पदार्थों का विकास करने वाली औषधि।
R 39, R 38, तथा R 50 पेट के रोगों में अथवा प्रसव के बाद।

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