Reckeweg R52 in Hindi, उल्टी, मतली, मोशन सिकनेस का इलाज

Reckeweg R52 medicine in Hindi, ulti motion sickness ka ilaj

Dr.Reckeweg R52 Medicine in Hindi: मूल-तत्व: एथूजा D6, एपोमॉर्फिन हाइड्रो. D12, कोकुलस D12, कोल्चिकम D12, इपेकाक. D8, नक्स वोम. D30, पेट्रोलियम D12, वेराट्रम D30.

लक्षण : मतली (nausea), जी मिचलाने की अनुभूति (जैसे वाहन चलाते समय या उड़ान भरते समय), समुद्री यात्रा की बेचैनी, गर्भावस्था में मतली (शामक प्रभाव)। अन्य विकारों के कारण उत्पन्न उबकाई जैसे संवहन की कमजोरी, क्षय या कुपोषण के शिकार बच्चे या जठरीय अम्लपित्त आदि।
नवजात शिशुओं तथा बच्चों द्वारा एसिटोनिय उल्टी। शराब पीने वालों की सुबह उठने पर उल्टी तथा पेट की सर्दी। ठंडा पसीना तथा मतली विशेषकर संवहन की दुर्बलता में तथा पित्त शूल के पूर्व। गुर्दों में दर्द के साथ उल्टी में, अंडाशय में व्रण के कारण उल्टी में, आँतीय मरोड़ तथा शूल, अफारा के साथ मतली और उल्टी में पूरक औषधि है।
क्रिया विधि : एथूजा साइनेप : जठरीय अम्लता (Gastric Catarrh) के साथ मतली और उल्टी की इच्छा होने पर विशिष्ट क्रिया, बच्चों और स्तनपान करने वाले शिशुओं में भी।
एपोमॉर्फिन हाइड्रो : विभिन्न प्रकार की उल्टी में विशिष्ट दवा। सगर्भता के दौरान प्रचुर मात्रा में उल्टी होने की अवस्था में लक्षणों के अनुरूप कार्य करती है।
कोल्चिकम : उल्टी की प्रवृत्ति तथा भोजन की गंध से मतली।
इपेकाकुआन्हा : उल्टी और मतली, जिसमें अत्यधिक शराब पिये जाने तथा धूम्रपान किये जाने के कारण प्रातःकालीन उल्टी भी शामिल है।
पेट्रोलियम : गतिशील वस्तुओं आदि को देखने से (यात्रा के दौरान) होने वाली मतली।
वेराट्रम : संवहन सम्बन्धी कमज़ोरी साथ में सन्निपात। चक्कर आना तथा पसीना।

खुराक की मात्रा : गर्भावस्था, समुदी यात्रा की बेचैनी, उपांत्र (Appendix) की जलन, पित्ताशय की जलन, ऑतीय मरोड, संवहन में कमजोरी, नवजात शिशुओं में पेट की सर्दी आदि में मतली के साथ उल्टी की प्रवृत्ति में सामान्यतः जल्दी-जल्दी खुराक लेनी चाहिए, प्रत्येक ५-१० मिनट पर १०-१५ बूँदें (संभव हो तो थोड़े गर्म पानी में या बिना पानी मिलायें जैसे वाहन चलाते समय हाथ में लेकर ही)। इस दवा के तकलीफ देह प्रभाव का कोई डर नहीं होता क्योंकि यह लीवर के लिए नुकसानदेह नहीं होती, जबकि इसके विपरीत, यह उद्दीपक के रूप में कार्य करती है। अधिक से अधिक, प्रारंभ में विषैले भोजन को ग्रहण करने के बाद उल्टियाँ बढ़ सकती हैं। जैविक दॄष्टिकोण से यह प्रतिक्रिया अस्वाभाविक नहीं है।

टिप्पणी : पूरक दवायें :
R 2, संवहन की दुर्बलता में।
R 4, हल्के हैजा में।
R 7, लीवर और पित्ताशय के प्रभावित होने पर।
R 16, आधा सिर के दर्द (Migraine) के कारण होने वाली उल्टी में।
R 37, आँतीय शूल और मतली में।
R 9, काली खाँसी में।
रक्त संचार विकारों में : R 67
ह्रदय सम्बन्धी वितालता में : R 66
गुर्दे सम्बन्धी रोग में : R 64

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