Reckeweg R51 Thyroid Medicine in Hindi, थायरॉयड विषाक्तता की दवा

Reckeweg R51 Homeopathy medicine in Hindi, Thyroid ki dawa

R51 Homeopathy Medicine in Hindi मूल-तत्व : बेलाडोना D30, आयोडम D30, लाइकोपस वर्जिन D12, नैट्रम क्लोरेट D 30, हैकला लावा D12, लैपिस एल्बस D12.

लक्षण: अवटुविषाक्तता (Thyreotoxicosis), नेत्रोत्सेधी गलगण्ड (Base-dow’s Disease), आँख के गोले का फैलाव (exoph-thalmia), थायरॉयड ग्रंथियों का विषीकरण (intoxication), साथ में हाथों में कँपकँपी, “नेत्रोत्सेधी गलगण्ड नेत्र (goggle-eye)”, पसीना, अन्ततः दस्तों की शिकायत होना तथा शरीर कमजोर होते जाना।

क्रिया विधि : R-51 के मूल-तत्व विषाक्त थायरॉइड ग्रंथियों (toxicated thyroid glands) के निर्विषिकरण (detoxication) का कार्य करते हैं।
बेलाडोना : मुख्य लक्षण : “नेत्रोत्सेधी गलगण्ड नेत्र (goggle-eye)”, पसीने के दौरे, तेज़ नाड़ी।
हैकला लावा तथा लैपिस एल्बस : तंतु गलगंड (fibrose struma) की संरचना के लिए प्रभावशाली।
आयोडम : आयोडीन की अत्यधिक सक्रियता के कारण थायरॉयड ग्रंथियों की अतिक्रिया विधि में विशिष्ट प्रतिक्रिया। इस विशिष्ट स्थिति में, दवा होम्योपैथिक नहीं बल्कि समोपचारिक (Isopathic) तरीके से कार्य करती है।
लाइकोपस विर्जिनिकस : तेज नाड़ी तथा ह्रदय की तेज गति जैसी अवस्थायें जो अधिकांशतः थायरॉयड सम्बन्धी विषाक्तता में पाये जाते हैं।
नैट्रम क्लोरेट : ह्रदय की बढ़ी हुई धड़कन, दुर्बलता, चिड़चिड़ापन आदि में प्रभावी औषधि। थायरॉयड की प्रक्रिया पर नियमनकारी प्रभाव दवा की सामान्य प्रक्रिया का लक्षण है।

खुराक की मात्रा: प्रथम ८ दिनों में, प्रतिदिन ४ बार भोजन के पूर्व थोड़े पानी में १०-१५ बूँदें। बाद में ८ दिनों तक, प्रतिदिन ३ बार, फिर दिन में दो बार वही खुराक लें।

टिप्पणी : कुछ रोगियों में, जो दवाओं के प्रति संवेदनशील होते हैं, उच्च तनुकरण के उपरान्त भी प्राथमिक प्रतिक्रिया हो सकती है, ऐसी स्थितियों में लगभग २-३ दिनों के लिए उपचार रोक देना चाहिए। इस दौरान निम्नलिखित दवाओं का प्रयोग कर सकते हैं :
R 31, निस्सारण तथा कमज़ोरी में।
R 4, अतिसार में।
R 2, सशक्त नाड़ी में।
साथ ही, स्नायु-तंत्रिकाओं के लिए हमारी दवाऐं, R 36, तथा R 33 अनुमोदित हैं।
यह स्पष्ट है, की आयोडाइज्ड नमक के साथ किया गया कोई उपचार अथवा आयोडीन का कोई प्रयोग, साथ ही हार्मोन्स (थायरॉयड ग्रंथि) का प्रयोग रोक देना चाहिए, क्योंकि इनके कारण रोग तीक्ष्ण रूप से बढ़ सकता है।

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