R24 Medicine for Rib Pain, पसलियों में दर्द, सांस लेने में कठिनाई

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Reckeweg R24 for Pleurisy, intercostal neuralgia. डॉ.रेकवेग अर.२४ पसलियों में दर्द के लिए होम्योपैथी दवा (फेंफड़ो की झिल्ली का प्रदाह, पसलियों की अन्दरूनी नाड़ियों में दर्द). संकेत – सांस लेने में कठिनाई, अपेंडीसाइटिस , अंडाशय में सुजन, दिल की अस्तर में सूजन। जर्मन सीलबंद होम्योपैथी दावा – सुरक्षित और कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं

मूल-तत्व : सिमिसिफ्यूगा D6, कोलोसिंथिस D8, कालीकॉर्ब D6, नैट्रम सल्फ्यूरिक D6, रैनुनकुलस बल्बोस D 4, ब्रायोनिया D 4.

लक्षण : फेफड़ो की झिल्ली का प्रदाह, सीरमी झिल्लियों के प्रदाह के साथ डंक लगने जैसा दर्द । उपांत्र का प्रदाह (Appendicitis in Hindi), अंडाशय का प्रदाह, उदरावरण का प्रदाह, हृदयावरण का प्रदाह आदि, तीक्ष्ण संधिशोथ (Arthritis in Hindi) तथा बहु-संधिशोथ (Polyarthritis) ।

क्रिया विधि :

सिमिसिफ्यूगा : फुफ्फुसावरक झिल्ली में दर्द (Pleurodynia), विशेषकर दाहिनी ओर के फेंफड़े में मुख्यतः अत्यन्त अधीर महिलाओं में (in oversensitive women) ।

कोलोसिंथिस : तंत्रिका प्रणाली को प्रभावित करता है, जहाँ फेफड़ों की झिल्ली के प्रदाह (Pleurisy) में इसकी प्रभावशाली क्रिया होती है ।

काली-कॉर्ब : फुफ्फुसावरक झिल्ली में दर्द, छाती में चुभन चाहे गति करे या ना करे, मुख्य रूप से दोपहर में रोगवद्धि । निमोनिया, जब प्रचुर पीब हो तथा आप आवाज के साथ बलगम निकले । फुफ्फुसीय-ऊतकों पर क्रिया करती है, पसीना निकलने के बाद निमोनिया होना । रिसाव के साथ फेफड़ों की झिल्ली में प्रदाह (Pleurisy in hindi) फुफ्फुसावरणीय-निमोनिया ।

नेट्रम सल्फ्यूरिक : उद्जनात्मक अथवा जलबहुल (hydrogenoid) शारीरिक संरचना में प्रमुख दवा; नम मौसम या नम वातावरण में, बाँयी ओर की 9वीं और 10वीं पसली (Ribs) के क्षेत्र में दर्द बढ़ जाता है । छाती की सर्दी ।

रैनुनकुलस बल्ब : पसलियों के अन्दरूनी भागों का आमवात (Rheumatism) । छाती में तेज़ दर्द, जो साँस लेने पर, दबाव तथा तापमान में परिवर्तन होने पर बढ़ जाता है, घुटन ।

खुराक की मात्रा : सामान्यतः प्रतिदिन भोजन के पूर्व 4-6 बार थोड़े पानी में 10-15 बूँदें । सुधार होने पर खुराक कम कर के प्रतिदिन 3 बार 10 बूँदें लें तथा पूरी तरह स्वस्थ होने तक इस उपचार को लंबे समय तक जारी रखें ।

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टिप्पणी : यदि इंफ्लुएंज़ा पहले हुआ हो : प्रतिदिन 2-3 बार अतिरिक्त औषधि के रूप में भी साथ में दें ।

यदि गलप्रदाह (Quinsy) पहले हुआ हो : दिन में एक या दो बार 10-15 बूँद R-1 भी साथ में दें ।

ब्रोंकायटिस तथा काली-खाँसी में : जस्टिन ड्रॉप्स तथा R 9 तथा जटसिन सिरप R 8 से तुलना करें ।

ब्रोंकायटिस सम्बन्धित सर्दी में : R 48 देखें ।

पुराने तपेदिक सम्बन्धी ब्रोंकायटिस में : R 57 देखें ।

अंडाशयशोथ में : R 1 के साथ बारी-बारी से लेँ, साथ ही, R 38 एवं क्रमशः R 39 से तुलना करें ।

तीक्ष्ण उपांत्र के प्रदाह (appendicitis) में जब तक सर्जरी अनिवार्य न हो जाए : R 24 के साथ R 38 बारी-बारी से, प्रत्येक 1-2 घंटे पर 10-15 बूँदें दें ।

पुराने, बार-बार होने वाले उपांत्र के प्रदाह (Appendicitis) में : R 1, R 24, तथा R 38 की 10-15 बूँदें प्रतिदिन एक बार दें ।

तीक्ष्ण जोड़ों का प्रदाह (Arthritis) या अनेक जोड़ों के प्रदाह में : प्रत्येक 1-2 घंटे के बाद R 24 के साथ बारी-बारी से R 1 भी दें, प्रारंभ में आधे-आधे घंटे पर भी दे सकते हैं ।

पसलियों के अंदरूनी भागों के तंत्रिका-शूल में : R 24 के साथ बारी-बारी से R 69 भी दें ।

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